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बाराबंकी की रामनगर सीट पर भाजपा में टिकट की जंग: 40 दावेदारों ने दिखाई ताकत, स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा गरमाया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पौराणिक तीर्थ लोधेश्वर महादेवा में महादेवा कॉरिडोर का लोकार्पण किया है। इसके बाद से बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट पूरे प्रदेश में हाई-प्रोफाइल हो गई है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

3 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
बाराबंकी की रामनगर सीट पर भाजपा में टिकट की जंग: 40 दावेदारों ने दिखाई ताकत, स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा गरमाया
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महादेवा कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद गरमाई रामनगर की राजनीति

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट इन दिनों प्रदेश की राजनीति का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पौराणिक तीर्थ स्थल लोधेश्वर महादेवा में 'महादेवा कॉरिडोर' का भव्य लोकार्पण किए जाने के बाद इस क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ गया है। इस विकास कार्य के बाद से ही रामनगर विधानसभा सीट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के भीतर टिकट पाने की होड़ मच गई है।

वर्तमान में स्थिति यह है कि भाजपा के टिकट के लिए करीब 40 संभावित प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इन दावेदारों ने अपनी सक्रियता दिखाने के लिए पूरे क्षेत्र में होर्डिंग और बैनर लगवा दिए हैं, जिससे रामनगर की सड़कों और चौराहों पर चुनावी माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पार्टी के भीतर बढ़ती इस प्रतिस्पर्धा ने कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के बीच कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा बना चर्चा का विषय

टिकट की इस दौड़ के बीच 'स्थानीय बनाम बाहरी' का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा में है। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का मानना है कि पिछले कुछ समय से बाहरी जनप्रतिनिधियों के कारण क्षेत्र के विकास कार्यों पर असर पड़ा है। लोगों का तर्क है कि चुनाव जीतने के बाद बाहरी नेता अक्सर जनता से दूरी बना लेते हैं, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता। इसी कारण अब मांग उठ रही है कि पार्टी को किसी ऐसे व्यक्ति को मौका देना चाहिए जो स्थानीय हो और जमीन से जुड़ा हो।

रामनगर ब्लॉक प्रमुख संजय तिवारी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि पार्टी को कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामनगर की जनता और कार्यकर्ता क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर समझते हैं, इसलिए टिकट का फैसला करते समय स्थानीयता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, क्षेत्र से करीब 25 से 27 साथी अपनी दावेदारी मजबूती से रख रहे हैं, जो पार्टी के प्रति लंबे समय से समर्पित हैं।

संगठन की मजबूती और आगामी चुनाव की रणनीति

संजय तिवारी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से अपील की है कि रामनगर विधानसभा सीट पर किसी बाहरी व्यक्ति को थोपने के बजाय एक सक्रिय और निष्ठावान स्थानीय कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाया जाए। उनका कहना है कि एक स्थानीय प्रतिनिधि ही जनता के सुख-दुख में हमेशा उपलब्ध रह सकता है और क्षेत्र के विकास को गति दे सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामनगर का संगठन पूरी तरह से अनुशासित और एकजुट है।

कार्यकर्ताओं का दावा है कि रामनगर में भाजपा का संगठन बेहद मजबूत स्थिति में है। ब्लॉक प्रमुख के नेतृत्व में हजारों नौजवानों, ग्राम प्रधानों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर 2027 के चुनाव में पार्टी को पूर्ण बहुमत से जिताने का संकल्प लिया है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट मिलता है, तो वे अपनी मेहनत और संगठन की ताकत के दम पर रामनगर सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे।

भविष्य की राह और पार्टी नेतृत्व का रुख

रामनगर सीट पर टिकट के लिए मची यह होड़ भाजपा नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। जहां एक ओर पार्टी को जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी मोल लेना भी मुश्किल है। कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं जगी हैं, जिसे देखते हुए हर दावेदार खुद को सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस हाई-प्रोफाइल सीट के लिए क्या रणनीति अपनाता है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो पाएगा कि भाजपा नेतृत्व स्थानीय कार्यकर्ताओं की मांग पर कितना ध्यान देता है और क्या रामनगर में किसी स्थानीय चेहरे को मौका मिलता है। फिलहाल, रामनगर की राजनीति पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है और हर गुजरते दिन के साथ दावेदारों की सक्रियता और बयानबाजी तेज होती जा रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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