बांसवाड़ा में भाजपा का बड़ा एक्शन: बागी तेवर दिखाने वाले 10 नेताओं को पार्टी से निकाला
बांसवाड़ा में निकाय चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले 10 कार्यकर्ताओं को भाजपा ने प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

निकाय चुनाव में भीतरघात पर भाजपा की सख्त कार्रवाई
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में निकाय चुनावों के दौरान टिकट बंटवारे के बाद मचे सियासी घमासान और भीतरघात को रोकने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ जाकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने वाले नेताओं पर गाज गिरी है। जिला भाजपा अध्यक्ष पूंजीलाल गायरी के निर्देश पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त 10 कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, वे पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की जीत की राह में बाधा बन रहे थे। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और बागी तेवर अपनाए अन्य नेताओं के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी है।
परतापुर-गढ़ी और बांसवाड़ा नगर परिषद में निष्कासन
पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार, सबसे अधिक कार्रवाई परतापुर-गढ़ी नगरपालिका क्षेत्र में की गई है। यहां कोर कमेटी से मिली रिपोर्ट के आधार पर 9 ऐसे नेताओं को निष्कासित किया गया है जो पार्टी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। इन निष्कासित लोगों में मंडल महामंत्री से लेकर पूर्व सरपंच स्तर के पदाधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी के निर्देशों को दरकिनार कर अपनी दावेदारी पेश की थी।
वहीं, बांसवाड़ा नगर परिषद के वार्ड नंबर 13 में भी पार्टी ने अनुशासनात्मक कदम उठाया है। यहां अधिकृत प्रत्याशी गौरव सिंह राव के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे लोकेंद्र वैष्णव को पार्टी से बाहर कर दिया गया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि संगठन के हितों के विरुद्ध जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका पद या प्रभाव कितना भी हो।
निष्कासित नेताओं की सूची और पार्टी का संदेश
पार्टी द्वारा निष्कासित किए गए प्रमुख नामों में दीपक जोशी (मंडल महामंत्री), चंदूलाल जोशी, ओम प्रकाश भावसार, सुभाष परमार, रीना परमार, सुरेंद्र सिंह राठौड़, ममता राठौड़, चिराग पंचाल, अतीक अहमद और लोकेंद्र वैष्णव शामिल हैं। इन सभी पर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने का आरोप है।
भाजपा जिला अध्यक्ष पूंजीलाल गायरी ने स्पष्ट किया है कि संगठन की मजबूती के लिए अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता पार्टी की विचारधारा और निर्णयों के साथ नहीं चल सकते, उन्हें संगठन में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह कार्रवाई न केवल वर्तमान चुनाव के लिए है, बल्कि भविष्य में भी पार्टी विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से की गई है।
सियासी प्रभाव और आगे की स्थिति
इस निष्कासन के बाद अब बांसवाड़ा के चुनावी मैदान में समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी के इस कड़े फैसले से उन कार्यकर्ताओं में डर का माहौल है जो टिकट न मिलने के कारण बागी हुए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से भाजपा अपने अधिकृत प्रत्याशियों को मजबूती देने का प्रयास कर रही है ताकि भीतरघात के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बागी नेता अपना नामांकन वापस लेते हैं या फिर निर्दलीय के रूप में ही चुनाव लड़ते हैं। फिलहाल, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के मूड में है। निकाय चुनाव के परिणाम ही यह तय करेंगे कि पार्टी की यह रणनीति कितनी कारगर साबित हुई है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!