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बलरामपुर: नेपाल और भारत की दोहरी नागरिकता का मामला, 27 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में 27 लोगों पर भारत और नेपाल की दोहरी नागरिकता रखने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आरोप है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.3K
बलरामपुर: नेपाल और भारत की दोहरी नागरिकता का मामला, 27 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
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फर्जी दस्तावेजों से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का आरोप

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 27 लोगों के खिलाफ भारत और नेपाल की दोहरी नागरिकता रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा कराए गए विस्तृत सत्यापन और जांच रिपोर्ट के बाद अमल में लाई गई है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारतीय पहचान पत्र बनवाए और सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाया।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी मूल रूप से नेपाल के डांग जिले के कोईलाबास क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। इन व्यक्तियों ने बलरामपुर के बालापुर (अनवरडीह), शीतलापुर रिजवान गली और तुलसीपुर जैसे क्षेत्रों को अपना स्थायी पता दर्शाकर आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार करवाए। इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग करके उन्होंने सरकारी खजाने से मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं का लाभ प्राप्त किया।

जांच में सामने आई चौंकाने वाली विसंगतियां

मामले की जांच के दौरान पुलिस और प्रशासन को कई ऐसी विसंगतियां मिली हैं, जिन्होंने इस धोखाधड़ी की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। जांच में पाया गया कि सूची में शामिल अब्दुल रहमान नामक व्यक्ति संबंधित पते पर कभी रहा ही नहीं। इसके अलावा, अब्दुल अजीज सिद्दीकी का नाम भी सरकारी अभिलेखों में सक्रिय पाया गया, जबकि उनकी मृत्यु कुछ महीने पहले ही हो चुकी थी। मृत व्यक्ति के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

प्रारंभिक साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि इन 27 लोगों के नाम भारत और नेपाल, दोनों देशों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर नागरिकता कानूनों का उल्लंघन है। आरोपी व्यक्तियों ने न केवल भारतीय पहचान पत्रों का दुरुपयोग किया, बल्कि सरकारी तंत्र को गुमराह कर उन लाभों को भी हासिल किया जो केवल भारतीय नागरिकों के लिए आरक्षित हैं।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया

जरवा थाना पुलिस ने सभी 27 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, पहचान छिपाने और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इन सभी दस्तावेजों का गहन सत्यापन कर रही है। संबंधित विभागों से रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन लोगों ने कब और किन सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है।

अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले समय में इसमें और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन लोगों को फर्जी दस्तावेज बनवाने में किन स्थानीय लोगों या बिचौलियों ने मदद की। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब अन्य संदिग्ध मामलों की भी समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके। स्थानीय लोग भी इस मामले के सामने आने के बाद सतर्क हैं और प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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