औरंगाबाद: लापता बुजुर्ग का शव नदी में मिला, पुलिस पर लापरवाही का गंभीर आरोप
मृतक जम्होर निवासी राजंद्र प्रसाद गुप्ता हैं। जिनकी कपड़ा कारोबारी थे। बेटे ने कहा कि पिता राजेंद्र 16 जुलाई को घर से निकले थे, जिसके बाद वे लापता हो गए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बटाने नदी से बरामद हुआ शव
बिहार के औरंगाबाद जिले से एक दुखद मामला सामने आया है, जहां तीन दिनों से लापता एक 72 वर्षीय बुजुर्ग का शव बटाने नदी से बरामद किया गया है। मृतक की पहचान जम्होर निवासी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता के रूप में हुई है, जो पेशे से एक कपड़ा व्यवसायी थे। इस घटना के बाद से मृतक के परिजनों में गहरा आक्रोश है और उन्होंने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
परिजनों के अनुसार, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता 16 जुलाई को घर से निकले थे और उसके बाद से ही उनका कोई अता-पता नहीं था। बेटे भूपेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि पिता के लापता होने के बाद उन्होंने अपने स्तर पर उनकी तलाश शुरू की थी। जब वे जम्होर थाना पहुंचे, तो आरोप है कि पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उन्हें रिश्तेदारों के यहां तलाशने की सलाह देकर वापस लौटा दिया।
पुलिस हिरासत से निकलने का आरोप
मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा परिजनों द्वारा किया गया है। उनका दावा है कि 16 जुलाई की रात ही डायल-112 की टीम ने राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को भटकती हुई अवस्था में बरामद कर लिया था। नियमानुसार उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने या परिजनों को सूचित करने के बजाय, उन्हें नगर थाना के सुपुर्द कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने न तो उन्हें इस बारे में कोई सूचना दी और न ही परिवार से संपर्क करने की कोशिश की।
परिजनों का यह भी कहना है कि 17 जुलाई की सुबह राजेंद्र प्रसाद गुप्ता नगर थाना से पुलिस की मौजूदगी में ही बाहर निकल गए थे। इसके बाद से वे फिर लापता हो गए और शनिवार को उनका शव बटाने नदी में तैरता हुआ मिला। इस घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
शव मिलने के बाद परिजनों ने जम्होर थानाध्यक्ष सूर्यवीर गुप्ता और नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा के समक्ष अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने पुलिस पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में भाजपा के व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र गुप्ता ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है और इसे पुलिस की विफलता करार दिया है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता कुछ समय से घरेलू कलह के कारण मानसिक तनाव में थे, जिसके चलते उनके घर से निकलने की बात कही जा रही है। हालांकि, उनकी मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों की जांच अभी जारी है। फिलहाल, पुलिस के आला अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थानीय लोगों में काफी रोष व्याप्त है।
पुलिस प्रशासन अब इस मामले की जांच में जुटा है कि आखिर बुजुर्ग को हिरासत में लेने के बाद परिजनों को सूचित क्यों नहीं किया गया और वे थाना परिसर से बाहर कैसे चले गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल, जम्होर और आसपास के इलाकों में इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
