राजस्थान निकाय चुनाव: अशोक गहलोत की मांग, युवाओं को मिले 50 फीसदी से ज्यादा टिकट
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने शहरी निकाय और पंचायतीराज चुनावों में जेन जी को ज्यादा से ज्यादा टिकट देने की पैरवी की है। निकाय चुनावों की तैयारी के लिए कांग्रेस वॉर रूम में हुई बैठक के बाद गहलोत ने मीडिया से बातचीम में कहा- मैंने कहा है 50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट जेन जी युवाओं को दें।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

निकाय चुनावों में युवाओं पर दांव लगाने की तैयारी
राजस्थान में आगामी शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी के भीतर बड़ा बदलाव लाने का सुझाव दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि पार्टी को 'जेन-जी' यानी युवा पीढ़ी को चुनाव मैदान में उतारने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
गहलोत ने बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए जोर देकर कहा कि पार्टी को कम से कम 50 प्रतिशत से अधिक टिकट युवा चेहरों को देने चाहिए। उनके अनुसार, देश में अब पीढ़ीगत बदलाव का दौर है और युवाओं की बढ़ती सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन के साथ युवाओं की ऊर्जा को जोड़कर ही पार्टी बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है।
सिफारिशी संस्कृति पर लगाम लगाने की नसीहत
टिकट वितरण को लेकर गहलोत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सिफारिश के आधार पर टिकट बांटने की परंपरा को पूरी तरह खत्म करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सिफारिश के दम पर उम्मीदवार चुने गए, तो पार्टी की हार तय है। उनका मानना है कि जमीनी हकीकत से जुड़े और सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि किसी प्रभावशाली नेता के करीबी को।
पूर्व मुख्यमंत्री ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वे भी किसी के लिए सिफारिश करते हैं, तो पार्टी को उसे नहीं मानना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें स्थानीय स्तर की जमीनी हकीकत की पूरी जानकारी नहीं हो सकती, इसलिए टिकट वितरण का निर्णय स्थानीय फीडबैक और वास्तविक कार्यक्षमता के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
युवाओं की सक्रियता और चुनावी माहौल
गहलोत ने हाल के दिनों में युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि जेन-जी ने देश का माहौल बदला है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और राहुल गांधी के नेतृत्व में चले आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की भावनाओं को समझना अब राजनीति की अनिवार्य शर्त बन गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश कांग्रेस के ऑब्जर्वर पूरी निष्पक्षता के साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवाओं को मौका देंगे।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक माहौल है और जनता में मौजूदा सरकार के प्रति नाराजगी है। यदि टिकट वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और सही तरीके से पूरी की जाती है, तो कांग्रेस के लिए जीत की राह आसान हो सकती है। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से अपील की कि वे उम्मीदवारों के चयन में पूरी सावधानी बरतें।
आगे की राह और उम्मीदें
आगामी चुनावों में कांग्रेस की रणनीति अब पूरी तरह से 'युवा और जमीनी कार्यकर्ता' के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। गहलोत के इस बयान के बाद पार्टी के भीतर टिकट के दावेदारों के बीच हलचल तेज हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान इस सुझाव को किस हद तक लागू करता है और क्या वास्तव में सिफारिशी संस्कृति को दरकिनार कर नए चेहरों को मौका दिया जाता है।
निकाय चुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाएंगे, बल्कि यह भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने का एक बड़ा मंच भी साबित होंगे। गहलोत का यह रुख पार्टी के भीतर एक नई बहस छेड़ने वाला है, जहां अब अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवाओं को भी अपनी दावेदारी पेश करने का बड़ा अवसर मिलने की उम्मीद है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!