अलवर: पत्नी से बातचीत के शक में छात्र का गला रेतने वाले को 10 साल की सजा
Alwar court sentences man for throat slit murder attempt on student. अलवर के एडीजे कोर्ट संख्या-2 ने मुख्य आरोपी को गुरुवार को 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। 19 अक्टूबर 2018 को परिवादी किशाेर ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

आठ साल पुराने मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला
राजस्थान के अलवर जिले में करीब आठ साल पहले हुई एक खौफनाक वारदात में स्थानीय अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे कोर्ट संख्या-2 ने एक छात्र पर जानलेवा हमला करने के मुख्य आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला 19 अक्टूबर 2018 का है, जब 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक किशोर को रावण दहन दिखाने के बहाने घर से ले जाया गया था। आरोपी पवन उर्फ बुला ने अपने एक नाबालिग साथी के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया था। पीड़ित किशोर ने सदर थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि उसे बाइक पर बैठाकर ले जाया गया था।
झाड़ियों में ले जाकर किया था जानलेवा हमला
सरकारी वकील महेश मीना के अनुसार, रावण दहन देखने के बाद लौटते समय चिरखाना पावर हाउस के पास आरोपी ने बाइक रोक दी। इसके बाद वह किशोर को जबरन झाड़ियों की ओर ले गया, जहां उसने और उसके साथी ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपियों ने किशोर का गला रेत दिया और सिर व चेहरे पर कई वार किए।
हमलावरों ने किशोर को मृत समझ लिया था और मौके से फरार हो गए। इस हमले में किशोर की आवाज तक चली गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और अपनी शर्ट फाड़कर गले पर पट्टी बांधी। किसी तरह वह रेंगते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचा, जहां एक होटल संचालक की मदद से उसने अपने परिजनों को घटना की सूचना दी।
परिजनों ने उसे तुरंत अलवर जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण उसे जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर करना पड़ा। लंबे इलाज के बाद किशोर की जान तो बच गई, लेकिन इस घटना ने उसे गहरे सदमे में डाल दिया था।
शक बना वारदात की वजह
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी पवन को शक था कि पीड़ित किशोर उसकी पत्नी से बातचीत करता है। इसी रंजिश के चलते उसने छात्र की हत्या की योजना बनाई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी की और कोर्ट में चालान पेश किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान और 22 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर एडीजे कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
यह मामला क्षेत्र में काफी चर्चित रहा था। अदालत के इस फैसले को न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है। पीड़ित परिवार ने लंबे समय तक चले इस कानूनी संघर्ष के बाद राहत की सांस ली है।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
