अलीगढ़: तेल कारोबार में निवेश के नाम पर ठगी, उपभोक्ता आयोग ने 12 लाख रुपये लौटाने का दिया आदेश
आयोग ने ताला नगरी निवासी मुकेश चौहान को शिकायतकर्ता वसीक अहमद की 12 लाख रुपये की रकम 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का मामला
अलीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तेल कारोबार के नाम पर हुई धोखाधड़ी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मामला ताला नगरी निवासी मुकेश चौहान से जुड़ा है, जिन्होंने सरसों के बीज खरीदकर तेल निकालने और उसकी बिक्री से मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से लाखों रुपये ऐंठ लिए थे।
शिकायतकर्ता वसीक अहमद ने आयोग के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि उन्होंने आरोपी के व्यापारिक प्रस्ताव पर भरोसा कर कुल 12 लाख रुपये का निवेश किया था। वादे के मुताबिक, उन्हें मुनाफे का हिस्सा मिलना था, लेकिन समय बीतने के साथ ही न तो उन्हें कोई लाभ मिला और न ही उनकी मूल पूंजी वापस की गई।
आयोग का कड़ा रुख और फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और तर्कों का बारीकी से विश्लेषण किया। आयोग ने पाया कि आरोपी मुकेश चौहान ने निवेश के नाम पर ली गई राशि का न तो कोई हिसाब दिया और न ही निवेश की गई मूल रकम वापस की। इसे उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन मानते हुए आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी मुकेश चौहान को शिकायतकर्ता वसीक अहमद को 12 लाख रुपये की पूरी राशि वापस करनी होगी। यह भुगतान केवल मूलधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के रूप में आरोपी को 5 हजार रुपये का हर्जाना भी शिकायतकर्ता को देना होगा।
उपभोक्ता अधिकारों की जीत
यह फैसला उन लोगों के लिए एक सबक है जो व्यापार के नाम पर लोगों को ठगने का काम करते हैं। उपभोक्ता आयोग की इस कार्रवाई से पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति को न केवल मूल राशि लौटानी पड़े, बल्कि ब्याज और मुकदमे के खर्च का बोझ भी उठाना पड़े।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदेश से निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी। उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि किसी भी प्रकार के व्यापारिक लेन-देन में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। यदि कोई सेवा प्रदाता या व्यापारी वादे के अनुसार काम नहीं करता है, तो उपभोक्ता कानून के तहत उसे दंडित किया जा सकता है।
वर्तमान में, पीड़ित पक्ष इस आदेश के बाद राहत महसूस कर रहा है। आयोग द्वारा तय की गई समय सीमा के भीतर आरोपी को यह पूरी राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी। यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए आयोग का दरवाजा खटखटा सकता है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!