ब्रेकिंग
नालंदा: संपत्ति विवाद में पिता की हत्या का खुलासा, 5 साल बाद बेटा गिरफ्तारभिंड के किसान पुत्र पवन तिवारी ने रचा इतिहास, उधार लेकर पढ़ाई की और बने सहायक प्राध्यापकऔरंगाबाद में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई: XUV से 195 किलो गांजा बरामद, चालक फरारउदयपुर एसओजी एएसपी का दलाल 2 करोड़ की रिश्वत लेते गिरफ्तार, बालोतरा में एसीबी ने बिछाया जालइंदौर में आईटी पेशेवरों की अनोखी दौड़: बिना वियरेबल बैंड के डिजिटल ट्रैकिंग से लैस होगी 'ISA मैराथन'मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के गंभीर आरोप, सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने का भी दावामध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया बदली: जमानत राशि में 60% की बढ़ोतरी, अब अलग बैंक खाते से होगा खर्चफरीदाबाद: पति को बचाने गई महिला की सेप्टिक टैंक की गैस से मौत, 6 दिन तक अस्पताल में चली जंग
नालंदा: संपत्ति विवाद में पिता की हत्या का खुलासा, 5 साल बाद बेटा गिरफ्तारभिंड के किसान पुत्र पवन तिवारी ने रचा इतिहास, उधार लेकर पढ़ाई की और बने सहायक प्राध्यापकऔरंगाबाद में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई: XUV से 195 किलो गांजा बरामद, चालक फरारउदयपुर एसओजी एएसपी का दलाल 2 करोड़ की रिश्वत लेते गिरफ्तार, बालोतरा में एसीबी ने बिछाया जालइंदौर में आईटी पेशेवरों की अनोखी दौड़: बिना वियरेबल बैंड के डिजिटल ट्रैकिंग से लैस होगी 'ISA मैराथन'मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के गंभीर आरोप, सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने का भी दावामध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया बदली: जमानत राशि में 60% की बढ़ोतरी, अब अलग बैंक खाते से होगा खर्चफरीदाबाद: पति को बचाने गई महिला की सेप्टिक टैंक की गैस से मौत, 6 दिन तक अस्पताल में चली जंग

लखनऊ में अखिलेश यादव का अनोखा दान: कलाकारों को दिए 51-51 हजार, तंज कसते हुए कही यह बात

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भगवान श्रीराम और हनुमान का भेष बनाए 2 कलाकारों को 51-51 हजार रुपए दिए। उन्होंने कहा- अब दान सीधे भगवान को दिया जाएगा, जिससे कि दान को कोई बीच में चंपत न कर पाए।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

3 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
लखनऊ में अखिलेश यादव का अनोखा दान: कलाकारों को दिए 51-51 हजार, तंज कसते हुए कही यह बात
मूल स्रोत

सीधे भगवान को दान देने की रणनीति

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान चर्चा बटोरी। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और हनुमान का स्वरूप धारण किए हुए दो कलाकारों को 51-51 हजार रुपये की राशि भेंट की। इस दान के साथ ही उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक बयान भी दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

अखिलेश यादव ने दान देते समय तंज कसते हुए कहा कि अब दान सीधे भगवान को दिया जाएगा। उन्होंने इसके पीछे का तर्क देते हुए कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि दान की राशि को बीच में कोई 'चंपत' न कर पाए। उनका यह बयान सीधे तौर पर व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर कटाक्ष माना जा रहा है।

राजनीतिक कटाक्ष और चर्चाएं

सपा प्रमुख ने अपने संबोधन में आगे कहा कि यह वही हनुमान जी हैं, जिन्हें लेकर पहले भी कई तरह की बातें सामने आ चुकी हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में भाजपा की कार्यशैली और धार्मिक आयोजनों में होने वाले चंदे को लेकर सवाल उठाए। अखिलेश का यह अंदाज सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह कदम आगामी चुनावों और जनता के बीच अपनी छवि को और अधिक मुखर करने की एक कोशिश है। वे लगातार भाजपा सरकार की नीतियों और उनके द्वारा किए जाने वाले दावों पर सवाल उठाते रहे हैं। इस बार उन्होंने धार्मिक प्रतीकों का सहारा लेकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है।

दान और आस्था का मुद्दा

अखिलेश यादव द्वारा कलाकारों को दी गई यह राशि व्यक्तिगत स्तर पर दी गई है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और आस्था हमेशा से ही केंद्र बिंदु रहे हैं। ऐसे में सपा अध्यक्ष का यह बयान यह दिखाने की कोशिश है कि वे भी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही वे व्यवस्था में पारदर्शिता की वकालत भी कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने जिस तरह से सीधे कलाकारों के हाथ में राशि सौंपी, उससे उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे बिचौलियों या किसी अन्य माध्यम के बजाय सीधे जनता और आस्था के प्रतीकों से जुड़ना पसंद करते हैं।

आगे की राजनीति

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव का यह 'सीधे दान' वाला बयान विपक्षी दलों के लिए एक नई चुनौती पेश करेगा। उत्तर प्रदेश में सपा लगातार अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है और ऐसे में छोटे-छोटे कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ बनाना उनकी रणनीति का हिस्सा है।

अंत में, यह पूरा घटनाक्रम लखनऊ की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे गया है। जहां एक तरफ सपा इसे एक नेक काम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इसे केवल एक चुनावी स्टंट के रूप में देख रहे हैं। बहरहाल, अखिलेश यादव का यह अंदाज आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस को हवा दे सकता है।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें