अजमेर में पुलिस का बड़ा एक्शन: साइबर ठगी के लिए बैंक खाते बेचने वाले 24 आरोपी गिरफ्तार
अजमेर में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फर्जी बैंक खातों यानी ‘म्यूल अकाउंट’ के नेटवर्क पर जिला पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए गए ‘म्यूल हंटर’ साइबर एरिया डोमिनेशन अभियान के तहत जिलेभर में एक साथ दबिश दी गई।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

म्यूल हंटर अभियान के तहत अजमेर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
अजमेर जिला पुलिस ने साइबर ठगी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया है। पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों पर 'म्यूल हंटर' साइबर एरिया डोमिनेशन अभियान के तहत जिले भर में एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने 24 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जो अपने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों को करने देते थे। इन खातों को तकनीकी भाषा में 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जा रहा था।
एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के अनुसार, पुलिस ने पहले उन संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की थी जिनमें संदिग्ध लेनदेन हो रहे थे। इसके बाद सिटी, रूरल और केकड़ी क्षेत्र में वृत्ताधिकारियों (CO) के नेतृत्व में 42 विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने भोर में 4 बजे एक साथ दबिश देकर आरोपियों को उनके ठिकानों से दबोच लिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक बरामद की हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि ये खाते सुनियोजित तरीके से ठगी के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।
लालच में फंसकर बेच दिए थे बैंक खाते
प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में छात्र, दिहाड़ी मजदूर और अन्य सामान्य लोग शामिल हैं। चंद रुपयों के लालच में आकर इन लोगों ने अपने बैंक खाते और उनसे जुड़ी गोपनीय जानकारी साइबर ठगों को सौंप दी थी। कुछ आरोपी तो सीधे तौर पर इस नेटवर्क का हिस्सा बनकर काम कर रहे थे। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पुलिस के लिए मुख्य अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस का मानना है कि ये म्यूल अकाउंट्स करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड के केंद्र बने हुए थे। इन खातों का उपयोग करके देश भर में लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। इस पूरे मामले में अब तक अलग-अलग थानों में 9 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस की टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों को किराए पर लेने या खरीदने वाले मास्टरमाइंड कौन हैं, जो पर्दे के पीछे से इस पूरे गिरोह का संचालन कर रहे थे।
आगे की जांच और साइबर सुरक्षा पर जोर
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस उन बड़े साइबर अपराधियों की तलाश कर रही है जो इन खातों का उपयोग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान अभी जारी रहेगा और भविष्य में भी संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के उस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है जो आम लोगों के खातों का इस्तेमाल ढाल के रूप में करते थे।
पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी साझा न करें। किसी भी प्रकार के लालच में आकर अपना बैंक खाता किसी अन्य को देना कानूनी अपराध है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साइबर ठग अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर उनके खातों का दुरुपयोग करते हैं, जिससे खाताधारक भी कानूनी मुसीबत में फंस जाते हैं।
अजमेर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। आने वाले दिनों में गिरफ्तार आरोपियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की धरपकड़ तेज करेगी। पुलिस मुख्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि साइबर फ्रॉड से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और इस तरह के अभियानों को पूरे राज्य में और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
वर्तमान में, पुलिस की प्राथमिकता उन मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने की है जो इन म्यूल खातों के जरिए ठगी का पूरा तंत्र चला रहे थे। इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की गहन जांच की जा रही है ताकि ठगी की गई राशि के अंतिम गंतव्य का पता लगाया जा सके। पुलिस की यह कार्रवाई साइबर सुरक्षा के प्रति एक कड़ा संदेश है कि डिजिटल युग में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!