आगरा: मौत को मात देकर लौटीं बुजुर्ग महिला का 9 दिन बाद निधन, अस्पताल में चल रहा था इलाज
आगरा की रहने वाली वृद्धा शाीला देवी को 9 दिन पहले डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था। मगर,अंतिम संस्कार से पहले उनकी सांसें लौट आई थीं।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र स्थित श्री नगर कॉलोनी में एक बेहद चौंकाने वाला और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला, जिन्हें डॉक्टर पहले ही मृत घोषित कर चुके थे, ने मौत को मात देकर नौ दिनों तक जीवन की जंग लड़ी। हालांकि, अंततः रविवार को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है।
अंतिम संस्कार से ठीक पहले लौटी थीं सांसें
मामला 65 वर्षीय शीला देवी का है, जो लंबे समय से लीवर संबंधी बीमारी से जूझ रही थीं। उनके पति हरिओम माहौर का पहले ही निधन हो चुका है और वह अपने बेटे सुनील माहौर के परिवार के साथ रहती थीं। बीमारी के चलते उन्हें इलाज के लिए बदायूं ले जाया गया था, जहां एक निजी अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। 30 जुलाई की तड़के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
परिजनों ने शव को एंबुलेंस के जरिए आगरा स्थित उनके घर पहुंचाया। घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं और शव को जमीन पर रखा गया था। तभी एक चमत्कारिक घटना हुई; करीब 17 घंटे बाद जब उनके दामाद ने उन्हें छुआ, तो शीला देवी के शरीर में हलचल हुई और उन्होंने उनका हाथ पकड़ लिया। इस दृश्य को देखकर परिजन हैरान रह गए और तुरंत उन्हें आगरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नौ दिनों तक चली जीवन की जद्दोजहद
अस्पताल में भर्ती होने के बाद शीला देवी की स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले थे। वह अपनी आंखें खोल रही थीं और हाथों को भी हिला पा रही थीं, जिससे परिजनों में एक नई उम्मीद जगी थी। उन्हें लगा कि शायद उनकी मां को दूसरा जीवन मिल गया है। इस दौरान अस्पताल में उनका गहन उपचार जारी रहा।
बेहतर इलाज की उम्मीद में परिजन उन्हें वापस बदायूं ले गए थे। वहां अस्पताल में उपचार के दौरान रविवार को उनकी स्थिति फिर से बिगड़ने लगी और अंततः उनकी सांसें थम गईं। नौ दिन पहले मिली इस 'दूसरी जिंदगी' का सफर आखिरकार दुखद अंत के साथ समाप्त हुआ।
चिकित्सा जगत में चर्चा का विषय
इस घटना ने स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है। एक व्यक्ति का मृत घोषित होने के बाद फिर से जीवित होना और नौ दिनों तक संघर्ष करना चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से भी एक दुर्लभ स्थिति मानी जा रही है। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन रहा, जहां पहले उन्होंने अपनी मां को खोने का गम मनाया, फिर उनके जीवित होने पर खुशी मनाई और अब उनके अंतिम निधन से परिवार फिर से शोक में डूब गया है।
शीला देवी का परिवार अब उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान परिजनों ने हर संभव प्रयास किया कि उन्हें बचा लिया जाए, लेकिन बीमारी की गंभीरता के आगे अंततः हार माननी पड़ी। स्थानीय लोग इस घटना को किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!