दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे ने आरोपों को नकारा, कहा- मैं उन्हें जानता तक नहीं
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले। उन्होंने कहा कि वह दिशा सालियान को जानते भी नहीं थे।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

आदित्य ठाकरे का स्पष्टीकरण: मैं दिशा से कभी नहीं मिला
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने मुंबई में एक प्रेस वार्ता के दौरान दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। ठाकरे ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह दिशा सालियान को न तो जानते थे और न ही कभी उनसे उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए कुछ लोग जानबूझकर उनका नाम इस मामले में घसीट रहे हैं।
यह बयान तब आया है जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2020 के दिशा सालियान मौत मामले में औपचारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। हालांकि, इस प्राथमिकी में अभी तक किसी को भी नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है। 28 वर्षीय दिशा सालियान की मृत्यु 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के कारण हुई थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश और जांच की स्थिति
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को सीबीआई को इस मामले की जांच के निर्देश दिए थे। अदालत ने मुंबई पुलिस की पिछली जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। सतीश सालियान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या की गई थी और मामले को दबाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने आदित्य ठाकरे सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा के अनुसार, शिकायत में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और सचिन वाजे सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। वकील का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी के खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो ही कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। यदि सीबीआई की रिपोर्ट नकारात्मक रहती है, तो परिवार को उस पर आपत्ति जताने का अधिकार होगा।
पुराने विवाद और पुलिस की भूमिका
दिशा सालियान की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने इसे एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) के तहत दर्ज किया था और बाद में इसे आत्महत्या का मामला बताया था। अक्टूबर 2020 में जांच बंद कर दी गई थी, लेकिन दिसंबर 2023 में इसे फिर से खोलकर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। उस समय भी SIT ने इसे आत्महत्या ही माना था। हाईकोर्ट ने छह साल तक प्राथमिकी दर्ज न करने पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
आदित्य ठाकरे ने पहले भी दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों से उन्हें बदनाम करने का एक सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। ठाकरे ने कहा कि जब उनका किसी घटना से कोई संबंध ही नहीं है, तो उन पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देना या उन्हें महत्व देना उचित नहीं है।
आगे की राह
अब जबकि सीबीआई ने इस मामले की कमान संभाल ली है, सबकी निगाहें जांच की दिशा पर टिकी हैं। सीबीआई की जांच यह स्पष्ट करेगी कि क्या दिशा सालियान की मौत वास्तव में एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर सरगर्मी तेज है, क्योंकि इसमें कई बड़े नामों का जिक्र किया गया है।
सतीश सालियान ने अदालत के फैसले के बाद राहत की सांस ली है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बेटी को खोने का दर्द कभी कम नहीं हो सकता। अब कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्यों का संकलन किया जाएगा, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस मामले में किन लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी और किसे क्लीन चिट मिलेगी।

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मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!