रेवाड़ी: अस्पताल जाने के दौरान सड़क पर हुआ प्री-मैच्योर बच्चे का जन्म, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
रेवाड़ी के कोसली में एक महिला ने सड़क पर प्री-मैच्योर बच्चें को जन्म दिया। 30 अक्टूबर को महिला की डिलीवरी होनी थी।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सड़क पर प्रसव पीड़ा से जूझती रही महिला
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के कोसली में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। साल्हावास रोड पर एक गर्भवती महिला ने सड़क के किनारे प्री-मैच्योर बच्चे को जन्म दिया। घटना शनिवार शाम की है, जब महिला भाकली स्थित अपने घर से अस्पताल जाने के लिए निकली थी। प्रसव पीड़ा इतनी तीव्र थी कि वह अस्पताल तक नहीं पहुंच सकी और पुराने सिनेमा हॉल के पास सड़क पर ही बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर हो गई।
स्थानीय लोगों की मदद से महिला को कुछ हद तक सहारा मिला। सूचना मिलने के करीब 10 मिनट बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में कोई भी महिला स्टाफ या नर्स मौजूद नहीं थी। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के गृह जिले में हुई इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल के चक्कर और डॉक्टरों पर लगे आरोप
पीड़ित महिला निशा, जो करीब आठ महीने की गर्भवती है, शनिवार सुबह ही जांच के लिए कोसली अस्पताल गई थी। वहां डॉक्टरों ने खून की कमी बताते हुए उसे अल्ट्रासाउंड के लिए रेवाड़ी रेफर कर दिया। परिजनों का कहना है कि रेवाड़ी में डॉक्टरों का व्यवहार उचित नहीं था और अल्ट्रासाउंड के बाद उन्हें बिना किसी सहायता के वापस घर भेज दिया गया। महिला को घर लौटने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने उनकी स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया। डॉक्टरों द्वारा सही समय पर उचित मार्गदर्शन न मिलने और एंबुलेंस में महिला स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण जच्चा-बच्चा की जान जोखिम में पड़ गई। घटना के बाद जब सीएमओ और पीएमओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
प्री-मैच्योर डिलीवरी और वर्तमान स्थिति
निशा की डिलीवरी की संभावित तारीख 30 अक्टूबर थी, लेकिन प्री-मैच्योर प्रसव के कारण स्थिति जटिल हो गई। सड़क पर बच्चे के जन्म के बाद एंबुलेंस कर्मियों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया और फिर जच्चा-बच्चा को कोसली अस्पताल पहुंचाया। वहां से प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें रेवाड़ी रेफर कर दिया गया। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
मूल रूप से गुजरात के रहने वाले इस परिवार के बारे में बताया गया है कि वे पिछले दो दशकों से भाकली गांव में मजदूरी कर रहे हैं। राकेश और निशा का परिवार लंबे समय से यहीं रह रहा है। इस घटना के बाद से क्षेत्र के निवासियों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी आक्रोश है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। एंबुलेंस में महिला स्टाफ का न होना और अस्पताल से रेफर करने के बाद मरीज की सुध न लेना, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सड़क पर प्रसव की यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आपातकालीन स्थितियों में आम जनता को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय और बेहतर चिकित्सा सुविधा की उम्मीद लगाए बैठा है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!