रेवाड़ी: अंडरपास में 14 फीट पानी भरने से चार गांवों का संपर्क टूटा, ग्रामीणों ने दी रेल रोकने की चेतावनी
रेवाड़ी में किशनगढ़ अंडरपास में जलभराव के विरोध में ग्रामीण बुधवार को रेवाड़ी पहुंचे। गांवों में किसी की मौत हो जाए तो मुर्दा जलाने के लिए 20 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ेगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में किशनगढ़-बालावास अंडरपास में जलभराव की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले कई दिनों से अंडरपास में करीब 14 फीट पानी जमा होने के कारण चार गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट गया है। इस समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी की निकासी नहीं की गई, तो वे रेलवे ट्रैक जाम कर देंगे।
अंतिम संस्कार के लिए भी 20 किलोमीटर का चक्कर
प्रभावित गांवों के निवासियों ने बुधवार को रेवाड़ी पहुंचकर जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण किशनगढ़, घासेड़ा, राजपुरा और बालावास गांवों का संपर्क टूट चुका है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यदि गांव में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए ग्रामीणों को 20 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। यह स्थिति क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद कष्टकारी बनी हुई है।
पूर्व ब्लॉक समिति सदस्य राकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को समस्या का लिखित समाधान देने के लिए आज शाम तक का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शाम तक अंडरपास से पानी नहीं निकाला गया, तो ग्रामीण कल सुबह 9 बजे रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे और रेल रोकने के लिए पटरियों पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से होने वाली किसी भी असुविधा के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
फसलों को भारी नुकसान, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
किसान यूनियन चढुनी गुट के प्रधान समय सिंह ने बताया कि चार दिन पहले हुई भारी बारिश के बाद से ही इन गांवों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी मामले की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। जलभराव के कारण न केवल आवागमन बाधित है, बल्कि खेतों में खड़ी फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। अंडरपास में पानी का स्तर लगातार बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर काम पर जाने वाले लोगों तक, हर कोई इस जलभराव की मार झेल रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
रेवाड़ी के इन गांवों में बनी स्थिति ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जल निकासी के लिए पर्याप्त पंप या अन्य संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसके कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन सतर्क हो गया है।
आगामी घंटों में प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि शाम तक पानी निकासी का काम शुरू नहीं होता है, तो कल सुबह रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं और अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम देखना चाहते हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!