पीलीभीत: जमीन सौदे के नाम पर 20 लाख की धोखाधड़ी, आरोपी को एक साल की कैद और भारी जुर्माना
पीलीभीत में जमीन के सौदे में धोखाधड़ी के मामले में त्वरित न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। सिविल जज (अवर खंड) त्वरित न्यायालयन्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष सिंह की अदालत ने आरोपी अब्दुल रफीक उर्फ गुड्डू को दोषी करार दिया।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

जमीन सौदे में ठगी का मामला
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में जमीन के सौदे के नाम पर हुई लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सिविल जज (अवर खंड) त्वरित न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्कर्ष सिंह की अदालत ने आरोपी अब्दुल रफीक उर्फ गुड्डू को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया है। इस मामले में पीड़ित को लंबे समय से न्याय का इंतजार था, जो अब पूरा हुआ है।
अदालत ने आरोपी अब्दुल रफीक को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 18 लाख रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला धोखाधड़ी के मामलों में कड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2015 का है, जब आरोपी और पीड़ित के बीच जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर समझौता हुआ था।
तीन किस्तों में लिए थे 20 लाख रुपये
मामले की जानकारी देते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मोहम्मद वासिल निवासी प्लॉटिंग कारोबारी महमूद मियां का संपर्क छोटा खुदागंज निवासी अब्दुल रफीक उर्फ गुड्डू से हुआ था। दोनों के बीच जमीन के सौदे को लेकर सहमति बनी, जिसके तहत महमूद मियां ने आरोपी को कुल 20 लाख रुपये नकद दिए थे। यह राशि तीन अलग-अलग किस्तों में दी गई थी।
सौदा तय होने के कुछ समय बाद ही आरोपी अब्दुल रफीक किसी अन्य मामले में जेल चला गया। इस वजह से जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधर में लटक गई। जब आरोपी जेल से बाहर आया, तो पीड़ित महमूद मियां ने उससे या तो जमीन की रजिस्ट्री करने या फिर अपनी रकम वापस लौटाने की मांग की। आरोपी ने उस समय तो आश्वासन दिया, लेकिन बाद में उसने धोखाधड़ी का रास्ता अपना लिया।
बाउंस हुआ चेक और कानूनी लड़ाई
पीड़ित के बार-बार तकाजा करने पर आरोपी ने उसे 9.60 लाख रुपये का एक चेक दिया और शेष राशि जल्द देने का वादा किया। हालांकि, जब पीड़ित ने यह चेक बैंक में जमा किया, तो पता चला कि जिस खाते का चेक दिया गया था, वह पहले ही बंद हो चुका था। चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित ने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
अंततः, पीड़ित महमूद मियां ने न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली। सुनवाई के दौरान अदालत ने पत्रावली पर मौजूद सभी साक्ष्यों, बैंक की रिपोर्ट और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों का गहनता से अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से पीड़ित के साथ धोखाधड़ी की है, जिसके बाद उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।
न्याय व्यवस्था की जीत
इस मामले में अदालत का फैसला पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। जमीन के सौदों में अक्सर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में यह फैसला एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने साक्ष्यों की पुष्टि के बाद आरोपी को कड़ा दंड दिया है, जिससे स्पष्ट होता है कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से आम लोगों का न्याय प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत होता है। 2015 से चल रही इस कानूनी लड़ाई का अंत आरोपी को सजा मिलने के साथ हुआ है। अब पीड़ित पक्ष को उम्मीद है कि अर्थदंड की राशि मिलने के बाद उसे हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!