पटना: रिश्वतखोरी में राजस्व कर्मचारी को 4 साल की जेल, कोर्ट ने लगाया जुर्माना
फुलवारीशरीफ अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी अमरेन्द्र कुमार सिन्हा को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अमरेन्द्र कुमार सिन्हा पर 18 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज किए गए एक पुराने मामले में फुलवारीशरीफ अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी अमरेन्द्र कुमार सिन्हा को दोषी करार देते हुए अदालत ने चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने से जुड़ा है, जिसने लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना किया।
नौ हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे आरोपी
घटना का विवरण निगरानी थाना कांड संख्या 7/2015 के अंतर्गत दर्ज किया गया था। तत्कालीन राजस्व कर्मचारी अमरेन्द्र कुमार सिन्हा पर आरोप था कि उन्होंने परिवादी अरुण कुमार से जमीन के नाम हस्तांतरण (म्यूटेशन) के बदले नौ हजार रुपये की अवैध मांग की थी। परिवादी ने इस मामले की शिकायत निगरानी ब्यूरो से की थी, जिसके बाद टीम ने जाल बिछाया। 23 जनवरी 2015 को जक्कनपुर थाना क्षेत्र के सिपारा स्थित मदर टेरेसा गली के एक किराए के मकान में आरोपी को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद से ही यह मामला अदालत में विचाराधीन था। सरकारी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रभारी किशोर कुमार सिंह ने मामले की पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और गवाहों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप सिद्ध हुए।
अदालत ने लगाया आर्थिक दंड
विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अमरेन्द्र कुमार सिन्हा को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 18 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। न्यायपीठ ने यह स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माना राशि जमा करने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त तीन महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी।
यह फैसला सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। निगरानी ब्यूरो की इस कार्रवाई ने यह साबित किया है कि रिश्वतखोरी के मामलों में साक्ष्य मिलने पर कानून अपना काम पूरी सख्ती से करता है। लंबे समय तक चले इस मुकदमे के बाद अब दोषी को सजा मिलने से परिवादी को न्याय मिला है।
अदालत का यह निर्णय उन सभी सरकारी कर्मियों के लिए एक चेतावनी है जो अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन के लिए आम जनता से अवैध वसूली करते हैं। निगरानी ब्यूरो की टीम ने इस मामले में शुरू से ही तकनीकी और साक्ष्य आधारित जांच की थी, जिसके कारण आरोपी के बचाव के सभी रास्ते बंद हो गए थे।
सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को हिरासत में लेकर जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस मामले में निगरानी ब्यूरो की सक्रियता और अदालत के त्वरित निर्णय ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूती प्रदान की है। पटना के इस मामले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और कानून का उल्लंघन करने वालों को अंततः सजा का सामना करना ही पड़ता है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!