MPPSC भर्ती विवाद: सतना के छात्र ने राहुल गांधी के सामने रखी 4.87 लाख अभ्यर्थियों की पीड़ा
इंदौर में शनिवार शाम हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में सतना जिले के अखिल भारती क्रांति ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। अखिल ने विंध्य क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और सरकारी भर्तियों में 13 प्रतिशत पदों पर लगी रोक से छात्रों को हो रही परेशानी बताई।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

इंदौर के कार्यक्रम में गूंजी छात्रों की आवाज
इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के युवाओं का दर्द खुलकर सामने आया। सतना जिले के रहने वाले MPPSC अभ्यर्थी अखिल भारती क्रांति ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों में आ रही बाधाओं को प्रमुखता से उठाया।
अखिल ने विशेष रूप से 13 प्रतिशत पदों पर लगी रोक का मुद्दा उठाया, जिससे प्रदेश के लाखों युवा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह प्रशासनिक और कानूनी पेचीदगियों के कारण योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और वे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
4.87 लाख अभ्यर्थियों पर संकट
अखिल ने मंच से जानकारी दी कि राज्य में करीब 4.87 लाख अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने 2019 में MPPSC की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू की सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बावजूद, 13 प्रतिशत पदों पर रोक के कारण उनकी नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भर्ती में हो रही इस देरी के कारण कई अभ्यर्थी अब आयु सीमा (ओवरएज) के दायरे से बाहर हो चुके हैं। अखिल ने विंध्य क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने और स्थानीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
संघर्ष और पारिवारिक पृष्ठभूमि
अखिल भारती क्रांति सतना जिले के रामपुर बघेलान ब्लॉक के खरवाही गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता स्वामीदीन कुशवाहा एक किसान हैं और पूर्व में दो बार सरपंच रह चुके हैं। अखिल ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की और बाद में सतना के व्यंकट क्रमांक-1 स्कूल से पढ़ाई की। कोटा में तैयारी करने के बाद वे 2018 में इंदौर आए और वहां से प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की।
अखिल के परिवार के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही है। उनके बड़े भाई गजेंद्र क्रांति ने भी पुलिस विभाग की परीक्षा पास कर ली है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगी रोक के कारण उन्हें भी अब तक नियुक्ति नहीं मिल पाई है। दोनों भाइयों का भविष्य फिलहाल सरकारी तंत्र की जटिलताओं में फंसा हुआ है।
पिता को बेटे के संघर्ष पर गर्व
अपने बेटे को राष्ट्रीय स्तर के नेता के साथ मंच साझा करते देख पिता स्वामीदीन कुशवाहा ने गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत खुशी का क्षण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सरकार युवाओं की इन समस्याओं को गंभीरता से सुने और इनका समाधान निकाले, तो प्रदेश के हजारों युवाओं का भविष्य संवर सकता है।
यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। युवाओं की ओर से उठाई गई यह आवाज स्पष्ट करती है कि मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाना एक बड़ी आवश्यकता बन गई है, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका हक समय पर मिल सके।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!