मऊ: साइबर ठगों के चंगुल से पुलिस ने बचाए करीब 3 लाख रुपये, पीड़ितों के खाते में लौटी रकम
मऊ साइबर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के खिलाफ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को टीम ने तीन पीड़ितों को ठगी गई कुल 2,92,449 रुपये की धनराशि वापस दिलाई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मऊ जनपद की साइबर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को बड़ी राहत पहुंचाई है। पुलिस टीम ने एक विशेष अभियान के तहत तीन अलग-अलग मामलों में ठगी गई कुल 2,92,449 रुपये की धनराशि वापस कराई है। यह सफलता पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर के मार्गदर्शन और अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार की देखरेख में हासिल की गई है।
तीन पीड़ितों को मिली बड़ी राहत
साइबर सेल की टीम ने तत्परता दिखाते हुए कोतवाली नगर क्षेत्र के अभिषेक कुमार के 10,114 रुपये और वंदना यादव के 2,339 रुपये वापस कराए। ये दोनों पीड़ित ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए थे, जिसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक खातों और पेमेंट गेटवे के साथ समन्वय स्थापित कर धनराशि को वापस दिलाने की प्रक्रिया पूरी की।
सबसे बड़ी सफलता सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बहरीपुर नई बस्ती निवासी अजीत सिंह के मामले में मिली। अजीत सिंह के साथ साइबर ठगों ने निवेश के नाम पर करीब 19.65 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उनके खाते में 2,79,996.90 रुपये वापस कराए हैं। इससे पहले भी पुलिस इस मामले में पांच लाख रुपये वापस करवा चुकी है, जिससे अब तक पीड़ित को कुल 7.79 लाख रुपये वापस मिल चुके हैं।
लालच देकर की गई थी ठगी
जांच में सामने आया कि ठगों ने अजीत सिंह को प्रतिदिन 10 प्रतिशत लाभ और भारी कमीशन का प्रलोभन दिया था। इस झांसे में आकर पीड़ित ने बड़ी रकम निवेश कर दी थी। जैसे ही पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, उन्होंने साइबर क्राइम थाने में सूचना दी। पुलिस ने तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों में मौजूद धनराशि को होल्ड करा दिया, जिससे यह रकम वापस मिल सकी।
इस मामले में पुलिस ने मु0अ0सं0 18/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है ताकि उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सके।
पुलिस की आम जनता से विशेष अपील
साइबर पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे किसी भी प्रकार के लुभावने ऑफर जैसे लॉटरी, लकी ड्रॉ, कैशबैक, सस्ते लोन या घर बैठे नौकरी के झांसे में न आएं। अक्सर ठग मोबाइल टावर लगवाने या कमीशन के नाम पर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करना जोखिम भरा हो सकता है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी बैंक या सरकारी संस्था फोन पर आपसे ओटीपी (OTP), पिन (PIN), सीवीवी (CVV), या यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगती है। आधार और पैन कार्ड जैसे व्यक्तिगत दस्तावेज साझा करने से पहले पूरी सावधानी बरतें। अपनी बैंकिंग जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करना वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है।
यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे घबराने के बजाय तत्काल प्रभाव से साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके अलावा, पीड़ित अपनी शिकायत आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाएगी, ठगी गई राशि को वापस पाने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!