ललितपुर: पोस्टमार्टम में 22 घंटे की देरी से परिजनों का फूटा गुस्सा, डीएम से लगाई गुहार
ललितपुर में पोस्टमार्टम हाउस में रखे तीन शवों का पोस्टमार्टम सोमवार शाम तक नहीं हो सका। पंचनामा कार्रवाई के कागजात पहुंचने में हुई देरी के कारण परिजनों में आक्रोश फैल गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पोस्टमार्टम हाउस में घंटों इंतजार करते रहे परिजन
ललितपुर के पोस्टमार्टम हाउस में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां रखे गए तीन शवों का पोस्टमार्टम सोमवार शाम तक भी शुरू नहीं हो सका, जिससे परिजनों को भारी मानसिक पीड़ा और परेशानी का सामना करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि पंचनामा की कार्रवाई में हुई देरी के कारण उन्हें घंटों तक शवों के मिलने का इंतजार करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, कुछ शवों को पोस्टमार्टम हाउस में रखे हुए 22 से 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका था, लेकिन सोमवार शाम 5 बजे तक भी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। इस देरी के कारण आक्रोशित परिजनों ने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
आकाशीय बिजली और दुर्घटना के मामले में भी देरी
बानपुर निवासी प्यारे लाल कुशवाहा ने बताया कि उनके भतीजे की मृत्यु 23 अगस्त को दोपहर करीब 2:30 बजे आकाशीय बिजली गिरने से हुई थी। शव को उसी दिन शाम 5 बजे मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखवाया गया था। सोमवार दोपहर 2 बजे शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी शाम 4:45 बजे तक पंचनामा के आवश्यक कागजात वहां नहीं पहुंचे थे।
इसी तरह का एक अन्य मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ग्राम कारी पहाड़ी से सामने आया। वहां के निवासी अमित ने बताया कि 23 अगस्त की शाम एक सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी रचना की मौत हो गई थी। घटना के 22 घंटे बाद भी सोमवार शाम 5 बजे तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी।
प्रशासनिक तंत्र पर उठे सवाल
परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस में डॉक्टर और अन्य स्टाफ दोपहर से ही मौजूद थे, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी न होने के कारण काम रुका हुआ था। पुलिस की ओर से पंचनामा के कागजात समय पर न पहुंचाए जाने को इस देरी का मुख्य कारण माना जा रहा है। इस लेटलतीफी के कारण दूर-दराज से आए परिजनों को भीषण गर्मी और अव्यवस्था के बीच घंटों इंतजार करना पड़ा।
पीड़ित परिवारों ने जिलाधिकारी सत्य प्रकाश से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनहीनता के कारण उन्हें अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी से की गई शिकायत में उन्होंने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में हो रही इस तरह की देरी न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि शोक संतप्त परिवारों के लिए भी एक बड़ी त्रासदी साबित हो रही है। फिलहाल, इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से जांच और सुधार के आश्वासन की प्रतीक्षा की जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!