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मध्य प्रदेश में मानसून का रौद्र रूप: 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, सतना में बिगड़े हालात

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में स्ट्रॉन्ग मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इस वजह से कई जिलों में बाढ़ आ गई है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

2 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश में मानसून का रौद्र रूप: 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, सतना में बिगड़े हालात
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पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में सक्रिय मानसून के मजबूत सिस्टम ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सतना जिले में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सतना में स्कूल और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और दक्षिणी हिस्से से गुजर रही ट्रफ लाइन के कारण बारिश का यह दौर जारी है। अगले 24 घंटों के दौरान सीधी, पन्ना, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला और सिवनी में अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जहां 4 इंच से अधिक पानी गिरने की संभावना है।

बाढ़ से प्रभावित जनजीवन और रेस्क्यू ऑपरेशन

लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट गए हैं। चित्रकूट में डेंगरहट-खोड़री पुल के बहने की सूचना है, और रामघाट के किनारे स्थित करीब 300 दुकानें जलमग्न हो गई हैं। बचाव दलों द्वारा प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। उमरिया के मछडार डैम में भी जलस्तर बढ़ने से पानी ऊपर से बह रहा है, जिससे निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

भोपाल के बड़ा तालाब का जलस्तर भी 1666.50 फीट तक पहुंच गया है, जो अपनी पूर्ण क्षमता के बेहद करीब है। तालाब के पूरी तरह भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जा सकते हैं, जिससे कलियासोत डैम में भी पानी का स्तर बढ़ जाएगा।

अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम अगले तीन दिनों तक और अधिक सक्रिय होगा। 3 सितंबर से इसका असर भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभागों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। 4 और 5 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 707.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 11 प्रतिशत कम है। हालांकि, जून के बाद जुलाई और अगस्त में हुई अच्छी बारिश ने जलस्रोतों की स्थिति में काफी सुधार किया है। प्रदेश के अधिकांश बांधों में अब 70 प्रतिशत से अधिक जलभराव हो चुका है।

प्रमुख शहरों में मानसून का रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में सितंबर के दौरान बारिश का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। भोपाल में पिछले पांच वर्षों से कोटे से अधिक बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि इंदौर में सितंबर का मासिक रिकॉर्ड 30 इंच का है। ग्वालियर और जबलपुर में भी मानसून के दौरान भारी बारिश की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो इस बार के सक्रिय सिस्टम के साथ दोहराई जा सकती हैं।

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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