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गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर सफर करना हुआ जोखिम भरा, डाउन लेन में बने गहरे गड्ढे

बरसात में प्रदेश की गई सड़कों में गड्‌ढे दिखाई देने लगे हैं। गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेस वे की डाउन लेन यानी जिस लेन से आप गोरखपुर की ओर आते हैं, उसपर कई गड्‌ढे हैं।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

9 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर सफर करना हुआ जोखिम भरा, डाउन लेन में बने गहरे गड्ढे
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उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश के बाद सड़कों की स्थिति बदतर होती जा रही है। गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे पर सफर करना अब वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। विशेष रूप से गोरखपुर की ओर आने वाली डाउन लेन पर जगह-जगह गड्ढे उभर आए हैं, जो तेज रफ्तार वाहनों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं।

एक साल में ही सड़क की हालत खस्ता

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 20 जून 2025 को किया गया था। निर्माण के एक साल बाद ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बरसात के दौरान डाउन लेन पर सड़क धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। सरयू नदी के पार वाले हिस्से में सड़क का एक हिस्सा इतना खराब हो गया था कि वहां एक वाहन का पहिया तक धंस गया था, जिससे निर्माण कार्य की मजबूती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

कुल 90 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को दो चरणों में बनाया गया था। पहला हिस्सा जैतपुर से फुलवरिया तक 48 किलोमीटर का है, जिसे एपीसीओ इंफ्राटेक ने तैयार किया था। वहीं, दूसरा हिस्सा फुलवरिया से सलारपुर तक 43 किलोमीटर का है, जिसका निर्माण दिलीप बिल्डकॉन द्वारा किया गया था। वर्तमान में दूसरे हिस्से में स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है।

मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति

सलारपुर से गोरखपुर की ओर आने वाले मार्ग पर कई स्थानों पर गड्ढे बन चुके हैं। हाल ही में इन गड्ढों को भरने के लिए पैचवर्क का काम किया गया था, लेकिन यह काम बेहद सतही और कामचलाऊ साबित हुआ है। पैचिंग के कुछ ही समय बाद सड़क फिर से उखड़ने लगी है, जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तेज गति से आ रहे वाहनों के लिए ये गड्ढे अचानक दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

एक्सप्रेसवे के दोनों हिस्सों में छोटे-बड़े गड्ढों की भरमार है। हालांकि, दूसरे हिस्से में समस्या अधिक गंभीर है, लेकिन पहले हिस्से में भी सड़क की सतह असमान हो गई है। इन गड्ढों को नजरअंदाज करना किसी बड़ी अनहोनी को न्योता देने जैसा है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है, जिससे आम जनता की सुरक्षा खतरे में है।

सुरक्षा के प्रति बरती जा रही लापरवाही

एक्सप्रेसवे का उद्देश्य यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाना था, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह मार्ग अब दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। बरसात के पानी के कारण सड़क की ऊपरी परत कमजोर हो गई है, जिससे गड्ढों का आकार लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते इन गड्ढों की वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है।

फिलहाल, इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। विशेषकर रात के समय इन गड्ढों को देख पाना और भी कठिन हो जाता है, जिससे अनियंत्रित होकर वाहन के उछलने या पलटने का डर बना रहता है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई या सड़क के सुदृढ़ीकरण की योजना सार्वजनिक नहीं की गई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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