गोंडा: छात्रवृत्ति सत्यापन के नाम पर अवैध वसूली का वीडियो वायरल, बाबू ने डीआईओएस पर लगाए गंभीर आरोप
गोंडा जिले के परसपुर स्थित तुलसी स्मारक इंटर कॉलेज में छात्रवृत्ति वेरिफिकेशन के नाम पर छात्रों से 100 रुपए मांगने का मामला सामने आया है। वीडियो सामने आने के बाद रविवार सुबह करीब 11:30 बजे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) डॉ. रामचंद्र ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

छात्रवृत्ति सत्यापन के लिए मांगी गई रिश्वत
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ परसपुर स्थित तुलसी स्मारक इंटर कॉलेज में छात्रों से छात्रवृत्ति सत्यापन के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। कॉलेज के एक बाबू का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह छात्रों से फॉर्म जमा करने के बदले 100 रुपये की मांग करता हुआ दिखाई दे रहा है। यह वीडियो शनिवार दोपहर का बताया जा रहा है, जो रविवार सुबह सार्वजनिक हुआ।
वीडियो में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि कॉलेज का बाबू छात्र को धमका रहा है कि बिना पैसे दिए फॉर्म जमा नहीं किया जाएगा। बाबू छात्र को यह भी निर्देश दे रहा है कि वह अपने घर से पैसे मंगवाए और तभी उसका फॉर्म स्वीकार किया जाएगा। इस घटना ने शिक्षा संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है, जिससे छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
डीआईओएस पर बाबू ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब वायरल वीडियो में बाबू ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) डॉ. रामचंद्र का नाम घसीटा। बाबू का दावा है कि शनिवार को जब डीआईओएस विद्यालय के निरीक्षण के लिए आए थे, तब उन्होंने बाबू से 2 हजार रुपये लिए थे। बाबू के इस दावे ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
हालांकि, डीआईओएस डॉ. रामचंद्र ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शनिवार को वे केवल विद्यालय के निरीक्षण के लिए गए थे और किसी भी कार्यालय में बाबू के पास नहीं गए थे। उन्होंने बाबू के दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
वीडियो के वायरल होने के बाद हरकत में आए डीआईओएस डॉ. रामचंद्र ने रविवार सुबह मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य को इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। डीआईओएस ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रवृत्ति सत्यापन एक सरकारी प्रक्रिया है और इसके लिए किसी भी छात्र को एक रुपया भी देने की आवश्यकता नहीं है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। छात्र संगठनों ने भी मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को इस तरह की अवैध वसूली का सामना न करना पड़े।
यह मामला न केवल एक कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि उन छात्रों की समस्याओं को भी उजागर करता है जो अपनी छात्रवृत्ति पाने के लिए पहले से ही संघर्ष कर रहे हैं। फिलहाल, जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही यह तय होगा कि कॉलेज प्रशासन और संबंधित बाबू पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!