धौलपुर: एनएच-44 पर डेढ़ साल से ठप है ट्रकों की चेकिंग, सरकारी खजाने को लग रहा चूना
आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 (NH-44) पर पिछले डेढ़ साल से परचून और अन्य माल से लदे ट्रकों की जांच नहीं होने का मामला सामने आया है। इससे राजस्थान सरकार को कर चोरी के जरिए राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

धौलपुर जिले से होकर गुजरने वाले आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 (NH-44) पर कर चोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पिछले डेढ़ साल से इस व्यस्त मार्ग पर मालवाहक ट्रकों की जांच नहीं की गई है, जिससे राज्य सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में परचून और अन्य सामान से लदे ट्रक गुजरते हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण इनकी सघन जांच नहीं हो पा रही है।
जांच के अभाव में नियमों की अनदेखी
एनएच-44 पर चलने वाले मालवाहक वाहनों के लिए ई-वे बिल, माल के दस्तावेज और कर संबंधी रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर पिछले अठारह महीनों से इस प्रक्रिया को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। सूत्रों का कहना है कि विभाग को कई बार कर चोरी और बिना वैध दस्तावेजों के माल परिवहन की सूचनाएं दी गईं, लेकिन इसके बावजूद किसी भी ट्रक को रोककर जांच करने की जहमत नहीं उठाई गई।
विभाग की इस कार्यप्रणाली ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब माल की मात्रा और दस्तावेजों की अनियमितता की खबरें सामने आ रही थीं, तब भी सेल टैक्स विभाग ने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया? यह स्थिति न केवल कर चोरी को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ईमानदार करदाताओं के साथ भी भेदभाव की स्थिति पैदा कर रही है।
उच्च अधिकारियों की अनुमति का बहाना
जब इस मामले पर सेल टैक्स विभाग के अधिकारी वेद प्रकाश मीणा से बात की गई, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला तर्क दिया। उन्होंने दावा किया कि विभागीय उच्च अधिकारियों की ओर से जांच करने की अनुमति नहीं मिल रही है। उनके अनुसार, सरकार और विभाग के वरिष्ठ स्तर से ही ट्रकों की चेकिंग पर रोक है, जिसके चलते स्थानीय अधिकारी चाहकर भी वाहनों की जांच नहीं कर पा रहे हैं।
यह बयान विभाग के भीतर की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि उच्च स्तर से जांच पर रोक है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके पीछे के कारण क्या हैं और क्या यह नीतिगत निर्णय है या फिर किसी बड़ी लापरवाही का हिस्सा। इस तरह की पाबंदियों से राज्य के राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
राजस्व को हो रहा संभावित नुकसान
एनएच-44 जैसे महत्वपूर्ण राजमार्ग पर नियमित चेकिंग न होना सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर असर डालता है। बिना जांच के गुजरने वाले ट्रकों में माल की हेराफेरी और कर चोरी की संभावना बनी रहती है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में राज्य के राजस्व संग्रह में और भी गिरावट देखी जा सकती है।
फिलहाल, स्थानीय लोग और जागरूक नागरिक अब उच्च अधिकारियों की ओर देख रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और यह स्पष्ट किया जाएगा कि डेढ़ साल तक ट्रकों की चेकिंग क्यों बंद रही। क्या यह किसी मिलीभगत का परिणाम है या फिर प्रशासनिक शिथिलता, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
राज्य सरकार को अब इस मामले में हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि राजस्व की हानि को रोका जा सके। एनएच-44 पर सुरक्षा और कर अनुपालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!