धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के खिलाफ ग्रामीणों का संघर्ष जारी, 30वें दिन भी गूंजी विरोध की आवाज
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध में सरमथुरा क्षेत्र में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। सागर मीना के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रैली निकाली।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

30 दिनों से जारी है ग्रामीणों का आक्रोश
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के गठन के विरोध में सरमथुरा क्षेत्र के ग्रामीणों का आंदोलन निरंतर जारी है। इस विरोध प्रदर्शन के 30वें दिन बिझौली ग्राम पंचायत के निवासियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बड़ी संख्या में ग्रामीण ट्रैक्टर, निजी वाहनों और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर तिरंगा लेकर धरना स्थल पर पहुंचे, जिससे आंदोलन को और अधिक गति मिली।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सागर मीना ने इस अवसर पर रैली का आयोजन किया और ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने एक स्वर में टाइगर रिजर्व के खिलाफ अपनी असहमति जताई।
आजीविका और विस्थापन का डर
ग्रामीणों का कहना है कि टाइगर रिजर्व के कारण उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस परियोजना से उनकी कृषि योग्य भूमि, पुश्तैनी घर और रोजगार के साधन प्रभावित होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वन्यजीवों के संरक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे अपने भविष्य और आजीविका की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सरकार टाइगर रिजर्व से संबंधित किसी भी निर्णय को लेने से पहले ग्रामीणों की स्थिति और उनके पुनर्वास या सुरक्षा के बारे में स्पष्ट नीति सामने रखे। उनका तर्क है कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति और उनके हितों की रक्षा किए बिना कोई भी परियोजना थोपना उनके अधिकारों का हनन है।
गुर्जर-मीना एकता पर दिया जोर
सागर मीना ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने गुर्जर और मीना समाज के बीच आपसी तालमेल और सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि दोनों समाज कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन में खड़े होते हैं, तो सरकार को उनकी आवाज सुनने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने गुर्जर समाज के लोगों से इस मंच पर जुड़ने और आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान करने की अपील की।
मीना ने कहा कि एकता ही इस संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और अपने हक के लिए एकजुट होकर डटे रहें। आंदोलनकारियों का मानना है कि यदि यह एकता बनी रही, तो प्रशासन को उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए वार्ता की मेज पर आना ही होगा।
आगे की राह
फिलहाल, सरमथुरा क्षेत्र में तनाव और विरोध की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिसके कारण ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम मानी जा रही है। फिलहाल, बिझौली और आसपास के गांवों के लोग पूरी तरह से इस टाइगर रिजर्व के विरोध में लामबंद नजर आ रहे हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!