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चित्रकूट: पागल कुत्ते के हमले का शिकार हुए छात्र की 18 दिन बाद मौत, परिवार ने चिकित्सा व्यवस्था पर उठाए सवाल

चित्रकूट के बरगढ़ में पागल कुत्ते के काटने से घायल 8 वर्षीय छात्र ने इलाज के 18 दिन बाद दम तोड़ दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

2 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
चित्रकूट: पागल कुत्ते के हमले का शिकार हुए छात्र की 18 दिन बाद मौत, परिवार ने चिकित्सा व्यवस्था पर उठाए सवाल
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स्कूल परिसर में हुआ था खौफनाक हमला

चित्रकूट जिले के बरगढ़ क्षेत्र के बोझ गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां पागल कुत्ते के काटने से घायल एक मासूम छात्र की जान चली गई। मृतक की पहचान कक्षा-2 के 8 वर्षीय छात्र श्याम द्विवेदी के रूप में हुई है। यह घटना 15 जुलाई को घटित हुई थी, जब एक आवारा पागल कुत्ता स्कूल की बाउंड्रीवाल फांदकर प्राथमिक विद्यालय बोझ फार्म के परिसर में घुस आया था।

इस हमले में श्याम द्विवेदी के साथ-साथ आंगनबाड़ी की 4 वर्षीय छात्रा जान्हवी भी गंभीर रूप से घायल हो गई थी। घटना के तुरंत बाद दोनों बच्चों को उपचार के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। इस घटना ने स्कूल परिसरों की सुरक्षा और आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपचार के दौरान बिगड़ी तबीयत

श्याम का उपचार मऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उसे एंटी-रेबीज के तीन टीके लगाए गए थे। उपचार के बाद 29 जुलाई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद उसकी स्थिति फिर से चिंताजनक हो गई। 1 अगस्त को जब उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी, तो परिजन उसे आनन-फानन में दोबारा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उसे उचित इलाज नहीं मिला, जिसके चलते उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। हताश होकर परिवार ने झाड़-फूंक का भी सहारा लिया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अंततः, रविवार को जब उसे शंकरगढ़ के एक निजी अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रशासनिक जांच और पोस्टमार्टम का इंतजार

इस पूरे मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी केडी पांडेय ने छात्र के इलाज की पुष्टि की है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि छात्र की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सटीक वजह का पता चल सकेगा। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच में जुटा है।

परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बेहतर उपचार मिलता, तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और स्थानीय लोग आवारा कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने की मांग कर रहे हैं।

यह मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हो पाएगा कि क्या एंटी-रेबीज उपचार में कोई कमी रह गई थी या संक्रमण का प्रभाव इतना अधिक था कि उसे रोका नहीं जा सका। प्रशासन ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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