भोपाल: शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर आमरण अनशन, खुले आसमान के नीचे डटे अभ्यर्थी
एक ओर माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से आए अभ्यर्थी 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने सरकारी स्कूलों को बंद करने के विरोध में राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

भोपाल के नीलम पार्क में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो बड़े आंदोलन एक साथ चल रहे हैं। जहां एक ओर शिक्षक भर्ती-2025 में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने सरकारी स्कूलों के मर्जर और क्लोजर के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। दोनों ही आंदोलनों ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
42 घंटे से पानी तक नहीं पिया, जारी है आमरण अनशन
शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर ब्यावरा के रहने वाले नरेंद्र राजपूत ने आमरण अनशन शुरू किया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नरेंद्र ने 21 अगस्त की आधी रात से अन्न-जल का त्याग कर दिया है। रविवार तक उनके अनशन को 42 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है। नरेंद्र का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके भविष्य की नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की है जो वर्षों से शिक्षक बनने का सपना संजोए हुए हैं।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-2) के प्रत्येक विषय में 3 हजार पद और प्राथमिक शिक्षक (वर्ग-3) में कुल 25 हजार पद स्वीकृत किए जाएं। उनका तर्क है कि विभागों में पद रिक्त होने के बावजूद सरकार पर्याप्त भर्तियां नहीं निकाल रही है, जिससे पात्रता परीक्षा पास करने के बाद भी योग्य उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह रहे हैं।
बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे संघर्ष
धरना स्थल पर केवल युवा ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों के साथ पहुंची महिलाएं भी शामिल हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ यहां डटी हुई हैं। उन्होंने बताया कि यह उनका 13वां आंदोलन है। नीलम पार्क के खुले मैदान में मच्छरों, गंदगी और जहरीले जीव-जंतुओं का डर बना रहता है, लेकिन अपने हक के लिए वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह सरोज कुशवाहा भी अपने छोटे बच्चे के साथ प्रदर्शन में शामिल हैं, जबकि उन्होंने अपने बड़े बच्चे को रिश्तेदारों के यहां छोड़ रखा है।
मौके पर मौजूद तहसीलदार प्रीति चौरसिया ने अभ्यर्थियों से मुलाकात की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल अनशनकारी की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
सरकारी स्कूलों को बचाने के लिए राज्य स्तरीय कन्वेंशन
नीलम पार्क में ही मध्यप्रदेश स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने सरकारी स्कूलों के बंद होने पर चिंता जताई है। समिति के संयोजक मुदित भटनागर ने बताया कि 2016 में प्रदेश में 1.21 लाख सरकारी स्कूल थे, जो अब घटकर 90 हजार के करीब रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'सीएम राइज' और 'एक शाला-एक परिसर' जैसी योजनाओं के नाम पर सरकारी स्कूलों को धीरे-धीरे खत्म कर रही है।
कन्वेंशन में शामिल अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार स्कूलों का स्तर सुधारना चाहती है, तो उसे सभी स्कूलों में समान रूप से सुविधाएं देनी चाहिए। कुछ चुनिंदा स्कूलों को मॉडल बनाने के चक्कर में बाकी स्कूलों को कमजोर करना या बंद करना शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की है कि स्कूलों में भवन, प्रयोगशाला, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और स्कूलों को बंद करने की नीति वापस नहीं ली गई, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की भी पुरजोर मांग की है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!