अयोध्या: 500 वर्षों में पहली बार रामलला ने किया झूला विहार, चांदी की पालकी में सवार हुए चारों भाई
अयोध्या में सावन झूलोत्सव की धूम है। 500 सालों बाद पहली बार शनिवार को भगवान रामलला झूला विहार पर निकले।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

अयोध्या में सावन के महीने की रौनक अपने चरम पर है। इस बार का सावन ऐतिहासिक है क्योंकि 500 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भगवान रामलला पहली बार झूला विहार के लिए अपने गर्भगृह से बाहर निकले। यह दृश्य न केवल भक्तों के लिए भावुक करने वाला था, बल्कि राम मंदिर निर्माण के बाद की एक बड़ी धार्मिक उपलब्धि के रूप में भी देखा जा रहा है।
चांदी की पालकी में सवार हुए चारों भाई
शनिवार को आयोजित इस विशेष उत्सव के दौरान भगवान रामलला को भव्य रूप से सजाई गई चांदी की पालकी में विराजमान किया गया। इस पालकी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें रामलला के साथ उनके तीनों भाई—भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न भी सवार थे। चारों भाइयों की एक साथ उपस्थिति ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
पालकी को सुंदर और सुगंधित फूलों से सजाया गया था। जैसे ही पालकी मंदिर परिसर से बाहर निकली, वहां मौजूद साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। बैंड-बाजों की मधुर धुन और भजनों के गायन ने पूरे माहौल को अलौकिक बना दिया।
साधु-संतों और भक्तों में उत्साह
इस अवसर पर अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों से आए साधु-संतों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और भजनों की स्वर लहरियों के बीच रामलला का झूला विहार संपन्न हुआ। भक्तों के लिए यह एक दुर्लभ क्षण था, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग अयोध्या पहुंचे थे।
सावन झूलोत्सव के दौरान राम मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों की सजावट और रोशनी ने मंदिर की भव्यता में चार चांद लगा दिए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, सदियों बाद रामलला को इस तरह झूला विहार करते देखना उनके जीवन का सबसे सुखद अनुभव है।
धार्मिक परंपराओं का पुनरुद्धार
राम मंदिर के निर्माण के बाद से ही अयोध्या में धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवों का स्वरूप बदल गया है। सावन झूलोत्सव का आयोजन इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उत्सव न केवल भगवान राम के प्रति आस्था को दर्शाता है, बल्कि प्राचीन भारतीय परंपराओं को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास भी है।
मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने इस आयोजन के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के भगवान के दर्शन कर सकें। भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित रही।
इस उत्सव की गूंज केवल अयोध्या तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से इसके वीडियो और तस्वीरें देश-विदेश में भी चर्चा का विषय बनीं। रामलला के झूला विहार का यह दृश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक यादगार पल बन गया है।
आगामी दिनों में भी मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। सावन के इस पावन महीने में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जो राम मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था को प्रदर्शित करती है।

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मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!